डॉक्टरों का खुलासा, अब गर्भधारण के दौरान मां को नहीं होगी डायबिटीज

डायबिटीज पर चर्चा करने के लिए देश-विदेश के डॉक्टर  जुटे जहां इस बीमारी से से जुड़े कई पहलुओं पर मंथन किया गया. डायबिटीज के तमाम पहलुओं पर जुड़े तथ्यों पर चर्चा करने के बाद यह बात सामने निकर कर आई कि अब शिशु के गर्भस्थ अवस्था में यह बात पता चल जाएगी कि मां को आगे डायबिटीज होगी कि नहीं. कई बार ऐसा होता है कि मां जब गर्भधारण करती है तो वह डायबिटीक नहीं होती, मगर जैसे जैसे गर्भकाल बढ़ता है तो उसे डायबिटीज रोग हो जाता है. इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी जस्टेसनल डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है. ऐसे में कुछ टेस्ट, खानपान सुधारने और कुछ विशेष दवाओं से इस रोग से मां व शिशु को बचाया जा सकता है.

इसी तरह स्टेम सेल थैरेपी, इंसुलिन पैच जैसे कई डिवाइस आ रहे हैं, जो इस बीमारी के खतरे को कम करेंगे. भारत में अभी 7 करोड़ डायबिटीज के रोगी हैं, जो दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं. यही स्थिति रही तो आने वाले 15-20 साल में यह आंकड़ा दुगना हो जाएगा.  डायबिटीज पर शनिवार से शुरू हुई दो दिवसीय कांफ्रेंस में देश-विदेश के डॉक्टरों ने इस रोग के नए कारण और निदान, नए शोध आदि पर चर्चा के दौरान इस तरह की जानकारी साझा की है.

डॉ. मनोज चड्ढ़ा ने बताया कि, अगर बच्चे को भविष्य में डायबिटीज के खतरे से बचाना है, तो मां को गर्भधारण की तैयारी करते वक्त अपनी डायबिटीज पर खास ध्यान रखना होगा. वह डायबिटीक नहीं है तो भी गर्भावस्था के दौरान ऐसा भोजन नहीं लेना चाहिए जो इस रोग को बढ़ाता है. आमतौर पर धारणा है कि मां को अपने साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी डबल भोजन लेना चाहिए, मगर यह ठीक नहीं है.

गर्भवती महिला को मेवा व घी के लड्डू देने का चलन है, जो डायबिटीज को बढ़ावा देते हैं. ऐसे में गर्भस्थ शिशु को भी पैदा होने से पहले ही डायबिटीज का खतरा हो जाता है. डॉक्टर बताते हैं कि, अब खानपान पर नियंत्रण और विशेष दवाओं के जरिए गर्भस्थ शिशु को इस रोग से सुरक्षित रखा जा सकता है.

डायबिटीज के साथ हाईपरटेंशन के खतरों पर प्रकाश डाला डायबिटीज व किडनी फेलियर,  भोजन के बाद की बढ़ी हुई शुगर के खतरों की जानकारी दी. डायबिटीक फुट और इस रोग से पैरों को होने वाले नुकसान,भविष्य में डायबिटीज के खतरों पर व्याख्यान दिया. कांफ्रेंस में देश-विदेश के एक हजार से ज्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं.

 

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