आज ही के दिन बदला था विंबलडन का इतिहास, इस खिलाड़ी ने किया था कुछ ऐसा

टेनिस का सबसे लोकप्रिय टूर्नामेंट विंबलडन ओपन इस समय जारी है। ग्रैंड स्लैंम के इस टूर्नामेंट को शुरू हुए लगभग 141 साल हो चुके हैं। पुरुषो के ग्रुप में इस टूर्नामेंट को सबसे ज्यादा स्विट्जरलैंड के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर ने जीता। फेडरर ने 8 बार इस खिताब को जीतकर अपनी जगह टॉप पर बनाई है। इस टूर्नामेंट को न जाने कितने खिलाड़ियों ने जीता लेकिन एक खिलाड़ी एसा है जो केवल एक बार जीतकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा गया। इस खिलाड़ी का नाम है ऑर्थर रॉर्बट एश।

अमेरिका का ये टेनिस खिलाड़ी विंबलडन जीतने वाला पहला अश्वेत खिलाड़ी है। इस खिलाड़ी ने आज ही के दिन यानी 5 जुलाई 1975 को फाइनल में अमेरिका के ही जिमी कोनर्स को हराकर पहले अश्वेत चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। इस फाइनल से पहले इन दोनों खिलाड़ियों के बीच तीन बार भिड़ंत हुई थी, जिसमें तीनों ही बार कोनर्स ने बाजी मारी थी लेकिन वो दिन इतिहास बदलने वाला दिन था।

मैच शुरू होते ही एश ने कोनर्स को बता दिया था कि वह आज किस मूड में खेलने वाले हैं, तभी तो उन्होंने पहला सेट केवल 19 मिनट में 6-1 से जीत लिया। दूसरे सेट में भी उन्होंने कोनर्स को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और 6-1 से जीत हासिल की। तीसरा सेट कोनर्स के लिए करो या मरो का सेट था, अगर उन्हे मैच में बने रहना था तो इस सेट को हर हाल में जीतना था और हुआ भी वही। कोनर्स ने दबाव में शानदार वापसी की और तीसरे सेट में 5-7 से जीत हासिल की।

अब चौथा सेट शुरू हुआ, दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष हुआ लेकिन अंत में ऑर्थर एश ने 6-4 से सेट जीतकर इतिहास रच दिया। उस वक्त कोई उम्मीद नहीं कर रहा था कि ऑर्थर रॉर्बट एश कोनर्स को हरा देंगे क्योंकि कोनर्स ना केवल उनसे मजबूत खिलाड़ी थे बल्कि पिछली बार के चैंपियन भी थे।

ऑर्थर रॉर्बट एश इससे पहले दो ग्रैंडस्लैम अपने नाम कर चुके थे। साल 1968 में उन्होंने यूएस ओपन और साल 1970 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया ओपन का खिताब अपने नाम किया था लेकिन इतिहास उन्होंने विंबलडन जीतकर ही रचा। 1980 में टेनिस को अलविदा कहने के बाद साल 1985 में उन्हे इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।

साल 1988 में इस महान टेनिस खिलाड़ी के लिए सबसे दुखदाई साल रहा। इस साल जब पूरी दुनिया को पता चला की ऑर्थर एचआइवी पॉजीटिव है। कइ लोगों का मानना था कि पांच साल पहले जब उनका ऑपरेशन हुआ था तो उन्हे एचआइवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था, जिसकी वजह से उन्हे ये बीमारी हुई। एड्स की वजह से उन्हे निमोनिया हो गया जिसकी वजह से 8 फरवरी 1993 को उनका देहांत हो गया। अमेरिका के इस महान टेनिस खिलाड़ी को मरणोपरांत उस वक्त के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने प्रेसीडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम से भी सम्मानित किया था।

 

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